बैंक ने बचाया, वाराणसी के डाक्टर को साइबर फ्रॉड से

 


बीएचयू से सेवानिवृत्त ह्रदय रोग विशेषज्ञ प्रो. पीआर गुप्ता को साइबर ठगों ने 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा।

 

वाराणसी लंका थाना क्षेत्र के चिकित्सक प्रो. पीआर गुप्ता को 20  मंगलवार  की सुबह दस बजे उनके मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। और कहा कि उनकी बेटी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त है। उसके खिलाफ मुकदमा लिखा जा रहा है। उसके साथ ही कई और लोग भी शामिल हैं।

 

ठगों ने उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।



 

उनको धमकी दिया कि रुपये न देने पर बेटी के साथ उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा और जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

इस बाद कई बार फोन चिकित्सक के पास आए। फोन करने वाले पुलिस अधिकारी बनकर चिकित्सक से अमेरिका में उनकी चिकित्सक बेटी और उनके बीएचयू व लंका स्थित तीन बैंक खातों की जानकारी लेने लगे। 

 

उन्होंने चिकित्सक को एक कमरे में बंद रहने और फोन काल के बारे में किसी को न बताने के लिए कहा। डॉ. पीआर गुप्ता साइबर ठगों की बातों से बुरी तरह से डर गए ।

उनके कहने पर रुपयों को साइबर ठगों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए लंका स्थित एचडीएफसी बैंक पहुंचे।

शक हुआ तो बताया मैनेजर को

 

चिकित्सक ने बैंककर्मी से अपना फिक्स डिपोजिट तोड़कर रुपये बैंक खाते में डालने को कहा। बैंककर्मी ने बड़ी रकम का फिक्स डिपाजिट तोड़ने का कारण पूछा तो वह नाराज हो गए। 

इसकी जानकारी बैंक मैनेजर को हुई तो उन्होंने भी चिकित्सक से बात की, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इस पर बैंक कर्मियों को संदेह हुआ और इसकी सूचना लंका थाना प्रभारी को दी।

लंका थाना प्रभारी ने बैंक में डॉ. पीआर गुप्ता से बात की तब भी वह कुछ बताने को तैयार न हुए। बार-बार अपने रुपयों की मांग करते रहे। उन्हें थाने लाकर समझाया गया तो उनका डर खत्म हुआ। उन्होंने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। 

बताया कि पुलिस अधिकारी बनकर बात करने वाले फोन से लगातार उनकी गतिविधियों की जानकारी ले रहे हैं। इस पर लंका थाना प्रभारी ने साइबर ठगों के नंबर पर बात की जिसके बाद से वह नंबर बंद हो गए।

जाँच के बाद पता चला कि जिन नंबरों से चिकित्सक को फोन आ रहा थे वह आंध्र प्रदेश के हैं।

 

बैंक कर्मियों को शक होने पर उन्होंने पुलिस को सूचित किया जिससे डॉक्टर साहब ठगी का शिकार होने से बच गए।

 

पुलिस आगे जाँच कर रही है |

 

हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए |

 

डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नही होती है , कोई भी पुलिस या अधिकारी वीडियो कॉल के माध्यम से  गिरफ्तार नही कर सकता , कभी भी निजी जानकारी किसी को ना बताये|

आप लोगों से विनम्र निवेदन है अधिक उम्र के लोगो को ज्यादा से ज्यादा साइबर क्राइम /फ्राड के बारे में जानकारी दे , सतर्क करें.

 

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